भारत की नई Education Policy, शिक्षा निति में बढ़ा बदलाव

भारत की नई Education Policy- कहते हैं देश में अगर बढ़ा बदलाव करना हो तो , देश की शिक्षा निति को बदलना चाहिए।  भारत में 34 वर्षो के बाद शिक्षा में बदलाव आया है , और इसकी शुरुआत कर दी गयी है। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आज इस नई शिक्षा नीति की घोषणा की है। इसलिए आज हम आप सबको बताएंगे कि इससे देश के तमाम छात्रों उनके परिवार और उनके माता-पिता के जीवन में अब क्या क्या बदलाव आने वाले हैं।

 

स्कूल शिक्षा का बदलेगा सिस्टम
1 . नई शिक्षा निति के अनुसार 10+2 के सिस्टम को 5+3+3+4 के चार भागो में बदला जायगा।
2 . पांच साल के पहले चरण में 3 साल pre-school ,और 2 साल पहली और दूसरी कक्षा की पढ़ाई होगी।
3 . इसके बाद तीसरी से पांचवी कक्षा और छठी से आठवीं और नौवीं से 12वी के तीन स्तर होंगे।
Teachers के लिए जरूरी होगा यह Eligibility Criteria
4 .कम से कम 4 साल की Integrated B.ED की डिग्री होना जरूरी है , Teachers के लिए।
उच्च शिक्षा का स्तर और ज्यादा बढ़ेगा
5 . विषयो के creative combination के साथ छात्रो को बिच में विषय बदलने का मौका मिलेगा।
6 . अलग अलग शिक्षा संस्थानों से मिले Credit का डाटा रखने के लिए Digital स्तर पर Academic bank of credit बनाया जायगा। Final Degree में इन credit को जोड़ा जा सकेगा।
7. सभी सरकारी और private कॉलेज पर एक ही तरह के नियम लागू होंगे।
8 . सभी University के लिए एक ही Entrance Exam होगा।
Minimum fees तय होगी
Minimum fees तय होगी
9 . सभी स्कूल और कॉलेज की फीस सीमा तय होगी , जिसमे प्राइवेट और सरकारी दोनों कॉलेज होंगे।

बदलती शिक्षा निति (2020)

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आज इस नई शिक्षा नीति की घोषणा की है। इसलिए आज हम आप सबको बताएंगे कि इससे देश के तमाम छात्रों उनके परिवार और उनके माता-पिता के जीवन में अब क्या क्या बदलाव आने वाले हैं।

अब तक भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था 10 प्लस टू के फॉर्मेट पर चलती थी। लेकिन अब इसे 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस फोर के फॉर्मेट में बदल दिया गया है। इसके तहत स्कूल के पहले 5 वर्षों की पढ़ाई फाउंडेशन स्टेज मानी जाएगी। यानी इस दौरान छात्रों के लिए मजबूत नींव तैयार की जाएगी। इस का कार्यक्रम एनसीईआरटी द्वारा तैयार किया जाएगा और इसमें प्री प्राइमरी के 3 वर्ष और पहली और दूसरी कक्षा का एक-एक वर्ष शामिल होगा। यानी प्री प्राइमरी के 3 साल और फिर पहली और दूसरी कक्षा के 2 साल इसके तहत बच्चों को खेल कूद और अलग-अलग गतिविधियों के जरिए पढ़ाई कराई जाएगी। यानी इन कक्षाओं के छात्रों के लिए किताबों का बोझ पहले जितना नहीं होगा इसलिए हम कहेंगे कि जो छोटे बच्चे अब स्कूलों में जाएंगे और अपने शिक्षा की यात्रा को आरंभ करेंगे। वह बहुत किस्मत वाले होंगे। इसके बाद अगले 3 साल यानी तीसरी कक्षा से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई के दौरान छात्रों को भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा। इसके तहत छात्रों का परिचय विज्ञान, गणित क्लास, सामाजिक विज्ञान और ह्यूमैनिटीज जैसे विषयों से करवाया जाएगा। इसके अगले 3 साल मिडिल स्टेज माने जाएंगे और इसमें कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के छात्र शामिल होंगे। इस पेज में छात्रों को तय पाठ्यक्रम के मुताबिक पढ़ाया जाएगा और इसके बाद 9वीं से 12वीं कक्षा तक इस फॉर्मेट की 4 वर्षों वाली आखिरी स्टेज हुई। यह 4 साल की स्टेज। इसमें छात्रों में किसी विषय के प्रति गहरी समझ पैदा की जाएगी। उनकी विश्लेषण क्षमता को बढ़ाया जाएगा और उन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्कूलों में पहले जैसा क्रीम सिस्टम नहीं होगा। इसका मतलब यह है या नहीं। अगर आज का कोई छात्र फिजिक्स की पढ़ाई करना चाहता है तो अब ऐसा कर पाएगा और अगर अकाउंट का कोई छात्र कॉमर्स का कोई छात्र इतिहास की पढ़ाई करना चाहता है तो वह भी ऐसा कर सकता है। लेकिन संभव है कि इसके लिए अलग-अलग विषयों का एक फूल तैयार किया जाएगा और आपको उस फूल से ही अपनी पसंद के विषयो का चुनाव करना होगा। यानी अगर विज्ञान के छात्र को इतिहास में दिलचस्पी है और उसके पूल में यह दोनों मिले तभी छात्र इनकी पढ़ाई एक साथ कर सकता है। हालांकि अभी इस पर पूरा स्पष्टीकरण आना बाकी है, लेकिन पहले की जो व्यवस्था होती थी हमारे यहां तीन स्ट्रीम्स मानी जाती थी या तो आप साइंस लेते थे , या कॉमर्स लेते थे या आर्ट लेते थे और यदि आपने कॉमर्स या आर्ट्स लिया तो साइंस नहीं ले सकते थे ,लेकिन अब यह सब बदल जाएगा।अब आप फिजिक्स भी पढ़ सकते हैं। कॉमर्स भी पढ़ सकते हैं, अकाउंट पढ़ सकते हैं। एक साथ इतिहास भी पढ़ सकते हैं और फिजिक्स की पढ़ाई भी कर सकते हैं।

पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई अब मातृभाषा स्थानीय भाषा और आपकी राष्ट्रभाषा में ही होगी।अब अंग्रेजी में पढ़ाई की अनिवार्यता नहीं रहेगी। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। आप अपनी राष्ट्रभाषा में या अपनी लोकल भाषा में पढ़ाई कर पाएंगे। उदाहरण के लिए अगर आप पांचवीं कक्षा तक अपने बच्चे को। मराठी संस्कृत या गुजराती भाषा में पढ़ाना चाहते हैं तो अब आप ऐसा कर पाएंगे और अंग्रेजी सिर्फ एक विषय के तौर पर आपको पढ़ाई जाएगी। यानी स्कूलों का जबरदस्ती अंग्रेजी करण का दौर अब समाप्त हो जाएगा।

छोटी उम्र से ही Computer/Coding की जानकारी दी जायगी

छठी कक्षा में पहुंचने के बाद छात्रों को कंप्यूटर कोडिंग सीखने का मौका मिलेगा। यानी अब भारत के छात्र चीन जैसे देशों की तर्ज पर छोटी उम्र में ही सॉफ्टवेयर मोबाइल फोन एप्लीकेशन बनाने की तकनीक सीख पाएंगे और छठी कक्षा से ही छात्रों को इंटर्नशिप का भी मौका मिलेगा। अगर किसी छात्र की किसी खास विषय में रुचि है और वह उसकी प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करना चाहता है वह इस विषय से जुड़ी इंटर्नशिप कहीं भी कर सकता है। उदाहरण के लिए अगर आपका बच्चा पेंटिंग करने का शौक रखता है तो वह किसी पेंटर के पास अब इंटर्नशिप के लिए जा सकता है। अगर आपके बच्चे को सॉफ्टवेयर में इंटरेस्ट है तो किसी सॉफ्टवेयर कंपनी में अब अपने स्कूल के दौरान ही इंटर्नशिप कर सकता है।

नौवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक की परीक्षाएं अब सेमेस्टर के आधार पर होगी। 1 साल में 2 सेमेस्टर होंगे और हर 6 महीने पर एक परीक्षा होगी और दोनों सेमेस्टर के अंकों को जोड़कर आपकी फाइनल मार्कशीट तैयार की जाएगी। यानी अब एक छात्र के तौर पर आपको पूरे साल पढ़ाई करनी होगी और आप यह कह कर बच नहीं सकेंगे कि आप सिर्फ फाइनल एग्जाम की तैयारी करना चाहते हैं।इससे पहले आपने देखा होगा। वह सारे छात्र ऐसे होते हैं जो साल के सिर्फ आखिर में कुछ समय तक पढ़ते हैं। एक-दो महीने पढ़ाई कर लेते हैं और फिर उसके आधार पर वह फाइनल जो परीक्षा होती है, उस में बैठते हैं और मैं से बहुत सारे लोग अच्छे नंबर ले भी आते हैं। लेकिन यह वह लोग हैं जिन्होंने पूरे साल पढ़ाई नहीं की। अब आपको पूरे साल पढ़ाई करनी पड़ेगी। इसके अलावा बोर्ड की परीक्षाओं को आसान बनाया जाएगा और इसमें छात्रों की क्षमता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। रखने की क्षमता नहीं समझने की क्षमता पर ध्यान दिया जाएगा।

बोर्ड परीक्षा में राहत मिलेगा

बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को अब उनकी। संत की भाषा में परीक्षा लिखने की पूरी छूट होगी। उदाहरण के लिए अगर आप चाहें तो हिंदी अंग्रेजी में से किसी एक भाषा में अपनी परीक्षा दे सकते हैं। छात्रों के रिपोर्ट कार्ड को भी अब पहले की तरह तैयार नहीं किया जाएगा। किसी छात्र को फाइनल मार्क्स देते समय उसके व्यवहार एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में उसके प्रदर्शन और उसकी मानसिक क्षमताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। इसके अलावा रिपोर्ट कार्ड को 360 डिग्री एसेसमेंट के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसमें छात्र खुद को भी अंक देंगे।

कॉलेज की शिक्षा निति में बदलाव

कॉलेज में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी इस नई शिक्षा नीति में बहुत सारे बदलाव किए गए हैं। इसलिए जो छात्र अब कॉलेज में इसके बाद जाने वाले हैं, वह भी ध्यान से अभी देख ले।

अब देश के छात्र कॉलेज में एडमिशन के लिए कॉमन एप्टिट्यूड टेस्ट दे पाएंगे। इसका अर्थ यह है कि अगर बार कक्षा के बोर्ड एग्जाम्स में आपके ठीक नंबर नहीं आए हैं या आपके मार्क्स इतने नहीं आए हैं कि आपको कट ऑफ परसेंटेज के आधार पर सीधे किसी कॉलेज में एडमिशन मिल पाए तो आप कॉमन एप्टिट्यूड टेस्ट भी दे सकते हैं और फिर इस टेस्ट में आप के प्रदर्शन को आप के 12वीं कक्षा के नंबरों के साथ जोड़ दिया जाएगा और उस आधार पर आपको आपके मनपसंद कॉलेज में एडमिशन मिल पाएगा। ग्रेजुएशन की पढ़ाई को तीन और 4 वर्षों के कोर्स ड्यूरेशन में अब बांट दिया जाएगा। पहले अगर आप कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते थे तो आपको ग्रेजुएशन की डिग्री नहीं मिलती थी या तो आप पूरी पढ़ाई कीजिए और या बिलकुल मत कीजिए, लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अगर आप 1 साल के बाद कॉलेज छोड़ देते हैं तो आपको सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यह आपका सर्टिफिकेट कोर्स माना जाएगा। अगर आपने कॉलेज का फर्स्ट इयर कंप्लीट कर लिया और उसके बाद पढ़ाई छोड़ दी तो आपको सर्टिफिकेट मिलेगा। इसी तरह अगर आप सेकंड ईयर पास करने के बाद 2 साल के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं तो आपको डिप्लोमा दिया जाएगा और अगर आप थर्ड ईयर यानी 3 साल की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो आपको बैचलर्स डिग्री दी जाएगी और अगर आप 4 साल का कोर्स करके बैचलर्स डिग्री लेना चाहते हैं तो आपको रिसर्च के सर्टिफिकेट के साथ यह डिग्री मिलेगी।इससे उन छात्रों को बहुत फायदा होगा जो कॉलेज के दौरान किसी प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं।

4 वर्ष के इस कोर्स में स्कूल के छात्रों की तरह कॉलेज के छात्र भी अलग-अलग विषयों की पढ़ाई एक साथ कर पाएंगे। इस व्यवस्था को मल्टी एंट्री और मल्टी एग्जिट वाली व्यवस्था कहा जाता है। यानी छात्र जब जिस विषय की पढ़ाई करना चाहेंगे तो वह ऐसा कर सकेंगे और जब वह पढ़ाई छोड़ ना बीच आएंगे तो यह काम भी आसानी से कर सकेंगे। इसीलिए इसे मल्टी एंट्री और मल्टी एग्जिट का आ गया है। आप जब चाहे एंट्री ले सकते हैं और एग्जिट भी। इसके अलावा एक एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट बनाया जाएगा। इसके तहत अगर आप एक से ज्यादा कोर्स एक साथ करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर पाएंगे और जिस कोर्स को आप जहां तक कंप्लीट करेंगे उसके अंक इस क्रेडिट बैंक में जमा हो जाएंगे और फिर जब आप फाइनल डिग्री के लिए कोई फोर्स करेंगे तो उस क्रेडिट को इसमें जोड़ दिया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल होगी।

संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और उनकी टीम ने इस नई शिक्षा नीति पर आज क्या कहा

पूरी दुनिया में शायद इससे बड़ा परामर्श विचार-विमर्श कभी नहीं हुआ होगा। इतना बड़ा नवाचार यह दुनिया के लिए एक उदाहरण है जब किसी नीति पर देश के कोने-कोने से अभिभावकों से छात्रों से अध्यापकों से विशेषज्ञों से शिक्षाविदों। राजनीतिज्ञों से जनप्रतिनिधियों से और यहां तक कि 125000 ग्राम समितियों से विचार-विमर्श किया गया हो। यह बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि 34 साल से शिक्षा नीति में परिवर्तन नहीं हुआ था और इसलिए आज का यह जो परिवर्तन है और जो नई शिक्षा नीति है, मुझे विश्वास है कि पूरा समाज और सभी देशवासी इसका स्वागत करेंगे और दुनिया के शिक्षाविद भी इसको निश्चित रूप से सराहना करेंगे।

आज की व्यवस्था में यदि इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद याद 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश मैं आगे नहीं पढ़ सकता हूं तो मेरे पास कोई उपाय नहीं है। मैं आउट ऑफ द सिस्टम हो जाता हूं।

मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट सिस्टम में रहेगा कि 1 साल के बाद सर्टिफिकेट 2 साल के बाद डिप्लोमा 3 या 4 साल के बाद डिग्री यानी। जो क्रेडिट फर्स्ट ईयर के हैं, सेकंड ईयर के हैं जैसे बैंक के सेविंग अकाउंट होते हैं। वैसे ही अकैडमी क्रेडिट में डिजी लॉकर के माध्यम से हमारे वहां पर क्रेडिट रहेंगे। जोकि लास्ट सेमेस्टर में काम आयंगे।

Leave a Comment